हिंदी भाषियों का पलायन

हिंदी भाषियों का पलायन:

हिंदुस्तान में अब हिंदी भाषियों के लिए शायद अब बेगाना हो रहा है, हिंदी भाषियों पर हो रहे लगातार हमले से तो ऐसा ही लगता है | राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी का खामयाजा हमेशा जनता को ही भुगतना पड़ता है | चाहे वो पुर्वति या वर्तमान  की सरकार हो, आखिर कबतक आम और गरीब जनता इनका शिकार बनती रहेगी |

राजठाकरे की पार्टी MNS ने  जब २००८ में  हिंदी भाषियों पर हमला किया था, तो कांग्रेस ने कुछ नहीं किया और अब बीजेपी ने | सरकारे बदल जाती है लेकिन कमजोर और गरीबों का शोषण करना नहीं रुकता |

राजठाकरे और अल्पेश के संरक्षण में सरकारे जी-जान लगा देती है, पर जनता की कोई खबर लेने वाला नहीं सिर्फ राजनीती उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए ही उन्हें याद किया जाता है |  जिन हिंदी भाषियों को आज वहाँ से भगाया जा रहा है, वो ये कैसे भुलजाते है उनके राज्य के विकास और तरक्की में उनका अहम् योगदान है | आज वो सभी राज्य जो विकास में सभी राज्यों से आगे है वो इन हिंदी भाषियों की वजह से ही है | ऐसे राज्य जो आज आराम से दो वक्त की रोटी खा पा रहे है उसमे हिंदी भाषियों  का अहम् योगदान है | मुंबई की कमाई का मुख्य जरिया ही हिंदी है, जो हिंदी फिल्मों से प्राप्त होता है |
गुजरात का हीरे के उद्योग से जाना जाता है | जहाँ  ज्यादातर हिंदी भाषी ही काम करते है |  वो भी बहुत काम मेहनताने पर |

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